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When is Mohini ekadashi ?

  • Apr 25
  • 2 min read

मोहिनी एकादशी 2026 27 अप्रैल, सोमवार को है (स्मार्त/सामान्य मान्यता के अनुसार)।

एकादशी तिथि

  • प्रारंभ: 26 अप्रैल शाम लगभग 6:06 PM

  • समाप्त: 27 अप्रैल शाम लगभग 6:15 PM 

पारण (व्रत खोलना):

  • 28 अप्रैल सुबह लगभग 5:43 AM – 8:21 AM 


मोहिनी एकादशी की कथा, महत्व और व्रत कथा

मोहिनी एकादशी मंत्र   Gitu MIRPURI : SPIITUAL COACH
मोहिनी एकादशी मंत्र Gitu MIRPURI : SPIITUAL COACH

मोहिनी एकादशी का महत्व (Significance)

Mohini Ekadashi वैशाख शुक्ल एकादशी को आती है और अत्यंत पुण्यदायिनी मानी गई है। यह पाप-क्षय, मोह-माया से मुक्ति, मन की शुद्धि और विष्णु कृपा देने वाली एकादशी मानी जाती है। इसका नाम मोहिनी भगवान Mohini के मोहिनी अवतार से जुड़ा है—वह शक्ति जो भ्रम हरकर अमृत तत्त्व की ओर ले जाती है।


इस व्रत के फल बताए गए हैं—

  • पूर्व जन्म व वर्तमान कर्मदोष शमन

  • मोह, आसक्ति और भ्रम का नाश

  • धन-धान्य व सौभाग्य वृद्धि

  • मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति

  • विष्णुलोक प्राप्ति का पुण्य


मोहिनी एकादशी व्रत कथा (राजा युधिष्ठिर – श्रीकृष्ण संवाद)

Bhavishya Purana में वर्णित कथा के अनुसार:

एक बार Yudhishthira ने भगवान Krishna से पूछा— “हे प्रभु! वैशाख शुक्ल एकादशी का क्या नाम और महिमा है?”

श्रीकृष्ण बोले—“हे राजन्! यह मोहिनी एकादशी है। इसकी कथा सुनो।”

सरस्वती नदी तट पर भद्रावती नगरी में द्युतिमान नामक राजा राज्य करता था। वहाँ धृष्टबुद्धि नाम का एक वैश्य पुत्र था। वह जुआ, मदिरा, चोरी, दुराचार और पापकर्मों में लिप्त था। पिता ने उसे घर से निकाल दिया।

भटकते-भटकते वह जंगल पहुँचा। भूखा-प्यासा दुखी होकर एक आश्रम में गया, जहाँ ऋषि कौंडिन्य तप कर रहे थे। धृष्टबुद्धि ने अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा।

ऋषि बोले—“वैशाख शुक्ल मोहिनी एकादशी का व्रत करो। यह महान पापों को भी नष्ट करती है।”

उसने श्रद्धा से व्रत किया।

व्रत के प्रभाव से उसके पाप नष्ट हुए और अंत में वह दिव्य शरीर धारण कर विष्णुधाम को गया।

श्रीकृष्ण बोले:जो इस एकादशी का व्रत करता है, वह मोह-जाल से मुक्त होता है।


मोहिनी अवतार से जुड़ी कथा (समुद्र मंथन)

Samudra Manthana के समय जब अमृत निकला, देव-असुरों में विवाद हुआ। तब भगवान विष्णु ने Mohini रूप धारण कर असुरों को मोहित किया और देवताओं को अमृत प्रदान किया।

इसी कारण इस एकादशी को भ्रम-भंजन और अमृत-चेतना की एकादशी माना जाता है।


व्रत विधि

  • दशमी से सात्त्विक आहार

  • एकादशी उपवास (फलाहार/निर्जल सामर्थ्य अनुसार)

  • Vishnu पूजा, तुलसी अर्पण

  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जप

  • Bhagavad Gita या विष्णु सहस्रनाम पाठ

  • द्वादशी पारण


विशेष आध्यात्मिक अर्थ (गूढ़ अर्थ)

मोहिनी केवल आकर्षण नहीं—यह वह शक्ति है जो अविद्या के मोह को हटाकर आत्मिक अमृत देती है।

  • असुर = वासनाएँ

  • अमृत = आत्मज्ञान

  • मोहिनी = विवेक शक्ति

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाययाॐ विष्णवे नमः

मोहिनी एकादशी मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाययाॐ विष्णवे नमः


 
 
 

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